Indian Sex Stories


Full Version: दुल्हन की तरप
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मस्ती में मैं और भाभी नहा रहे थे।, भाभी मेरी चूचियाँ दबाती हुई बोली- तेरी चूत परेशान नहीं करती? एक महीने से बिना चुदे पड़ी है। एक बार लंड घुस जाए तो उसके बाद कितना ही बैंगन-गाज़र चूत में डाल लो, सुख नहीं मिलता। मौका अच्छा है, अमित से चुदवा ले, कुत्ते का लंड भी अच्छा मोटा है। इनके पीछे महीने में 5-6 बार मैं भी कुत्ते से चुदवा लेती हूँ, बहुत मज़ा देता है।
मैं भाभी की बातें सुनकर चकित थी, मैंने भाभी से कहा- भाभी, विश्वास नहीं होता कि आपने भाईसाहब के अलावा भी किसी का लंड चूत में डलवाया हुआ है।
भाभी बोलीं- प्यासी चूत पता नहीं औरत से क्या क्या करवा ले, मैं तो पुरानी रांड हूँ !
और उन्होंने अपनी कहानी बताना शुरू कर दी उन्होंने बताया एक बार उन्हें 6 महीने अकेले रहना पड़ा था, उनके तब तक एक बच्चा भी हो चुका था लेकिन इस निगोड़ी चूत ने इतना तंग किया कि दस दिन बाद लंड-लंड चिल्लाने लगी। तब तो मैं 24 की थी कितनी आग लगी थी इस चूत में कि जो भी जवान, बूढ़ा दिखता तो बस यही मन करता था कि मेरी चूत में लंड डाल दे। लेकिन साली जब जरुरत हो तो लंड डालने वाला भी नहीं मिलता।
भाभी की बातें सुन सुन कर मेरी बुर पानी छोड़ने लगी थी। भाभी बोलती जा रही थीं उन्होंने मेरी तीन उंगलियाँ चूत में डलवा ली थीं और मुझसे जोर जोर से अपनी बुर मसलवा रही थीं।
भाभी का बोलना जारी था, उन्होंने मुझे बताया कि पहले वो कलकत्ता में रहती थी जब उनके पति 6 महीने को बाहर गए तो उनकी चूत चुदने को कुलबुलाती रहती थी। उन्होंने अपनी दो तीन सहेलियों को जब यह बताया तो वो हँस कर मजाक में उड़ा देती थीं। उसके बाद पड़ोस में एक भाभी किराए पर रहती थीं। उनको जब मैंने अपनी चूत की खुजली के बारे में बताया उन्होंने मुझे एक आंटी से मिलवाया। आंटी ने मेरी चूत का जुगाड़ करवाया, उन्होंने मेरी एक महंगे होटल में सेटिंग करा दी।
मैं होटल मैं दोपहर में जब मन आता, चुदने जाने लगी, महीने मैं 4-5 बार चुदवा लेती थी। नए नए लंड से चुदने में बड़ा मज़ा आता था, चूत भी ठंडी हो जाती थी और ऊपर से कुछ कमाई भी हो जाती थी। इन 6 महीनों में मैंने 18 साल से लेकर 60 साल तक के 22 मर्दों के लंड खाए। हर लंड का अपना एक अलग मज़ा होता है।
उसके बाद तेरे भाईसाहब आ गए हम लोग कानपुर आ गए। जिंदगी आराम से चलने लगी। मेरी शर्म छूट गई थी, 10-12 आदमियों से आज भी मेरे सम्बन्ध हैं। तुम्हारे देवर अमित भी इस सूचि में है, बहुत अच्छा चोदू है, कुत्ता 3-4 बार मेरी गांड भी फाड़ चुका है लेकिन मस्त मज़ा देता है, तू भी चुदवा ले, इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा।
मेरी साँसें भाभी की बातें सुनकर तेज़ हो गई थी, मैं बोली- भाभी, मन तो चुदवाने का कर रहा है लेकिन डर लगता है !
भाभी हँसते हुए बोली- मस्त होकर चुदवा ! यहाँ कोन देखने वाला है? कल अमित के साथ अकेले ऊपर सोना और रात भर चुदना ! परसों बच्चे चले जाएँगे, तू अगर राज़ी होती है तो हम दोनों साथ साथ चुदेंगी।
मैं पहले से ही अमित से चुदने की सोच रही थी। अब मैंने सोच लिया कि कल अमित का लंड डलवा ही लूंगी। तभी भाभी ने घूमकर मेरी चूत की पलकों पर अपना मुँह रख दिया। आह ! जबरदस्त मज़ा था, मुझसे भी नहीं रहा गया मैं भी भाभी की चूत चूसने लगी। दस मिनट बाद हम दोनों का चूतरस एक दूसरे के मुँह में था। रात के दो बज़ गए थे, भाभी और मैं नंगी ही सो गईं।
सुबह 9 बजे मेरी नंगी चूत में भाभी ने अपनी उंगली घुसा दी, मैं हड़बड़ा कर उठी, भाभी ने मेरी चूचियाँ दबाते हुए चुटकी ली और बोलीं- अब उठ जाओ, देवर जी ऑफिस जाने वाले हैं, दो बार पूछ गए कि भाभी उठीं या नहीं ! जाओ और थोड़ा अपनी जवानी का रस पिला आओ।
मैंने उठकर कुरता-पजामा पहन लिया और ऊपर अमित के कमरे में आ गई। मैं जब ऊपर गई अमित मुस्करा कर देखते हुए बोला- आप तो बहुत देर तक सोईं? मैं आपके लिए चाय बना कर लाता हूँ।
मैंने कहा- नींद ही नहीं खुली।
मैंने आगे बढ़कर अमित को बाँहों में भर लिया, कस कर चिपकते हुए बोली- आज ऊपर ही सोऊँगी। पूरी रात तुम्हारी याद आती रही !
हम दोनों आपस में एक दूसरे की बाँहों में 5 मिनट सिमटे रहे। इसके बाद अमित चाय बनाने चला गया और मैंने कुरता पजामा उतार कर स्कर्ट ब्लाउज बिना ब्रा पेंटी के पहन लिया। अमित जब चाय लेकर आया तो मेरा शवाब उसे ललचा रहा था।
चाय पीने के बाद अमित से बोली- थोड़ा मेरी गोद में लेट लो !
अमित मेरी गोद मैं लेट गया। मैंने उसकी टीशर्ट उतरवा दी नीचे वो कुछ नहीं पहने था। मैं उसकी निप्पल हल्के से नोचते हुए उसके जवान सीने पर हाथ फेरने लगी, उसके बाद होंटों में उंगली चुसवाते हुए बोली- रात को मेरी याद आई थी?
अमित बोला- भाभी, रात भर सो नहीं पाया, आपके दूध चूसने का मन करता रहा।
मैंने अपने ब्लाउज के दोनों बटन खोल दिए और अमित का मुँह अपने दूधों की टोंटी में लगा दिया और बोली- लो, जी भरकर चूस लो।
अमित ने मेरा एक स्तन अपने मुँह में भर लिया और दूसरा हाथों से दबाने लगा, वो कभी एक चूची को चूसता कभी दूसरी को। मैं उसे कस कर अपने स्तनों से चिपकाए हुए थी।
अमित मेरे स्तनों से खेलते हुए बोला- भाभी, आज ऑफिस जाने का मन नहीं कर रहा है। लेकिन बहुत जरूरी काम है, साला जाना पड़ेगा।
मैंने नेकर के ऊपर से अमित का लौड़ा सहलाया और बोली- चलो, अब उठ जाओ, शाम को मस्ती करेंगे।
अमित और मैं उठ गए।
मैं उठी और दरवाज़े के पास पड़ा अख़बार उठाने लगी। मेरी स्कर्ट ऊपर उठ गई, अमित दूर से मेरे नंगे चूतड़, गांड और मस्त हिलती चूचियाँ देखकर पगला गया और दौड़ते हुए आकर घोड़ी बनी मुझे पीछे से लपक लिया और मेरी चूचियाँ दबाने लगा- भाभी, बहुत मन कर रहा है !
मैं बोली- थोड़ा हटो न।
अमित को हटाकर मैंने उसे बाँहों में भरा और बेशर्म बनते हुए पूछा- चोदने का मन कर रहा है क्या?
अमित बोला- हाँ भाभी, आपकी नंगी गांड देखकर आपको चोदने का मन कर रहा है।
मैं अपना पानी छोड़ रही थी, मैं बोली अमित- तुम्हारा घोड़ा बहुत टनटना रहा है, पहले उससे दोस्ती करती हूँ !
और मैंने अमित की नेकर नीचे सरका दी, अमित का 8 इंची लम्बा और 4 इंची मोटा लौड़ा फनफनाता हुआ बाहर आ गया। एक महीने बाद इतना सुंदर लोड़ा देखकर मैं पागल हो गई, मैंने बिना देर किए उसे मुँह में ले लिया और चूसने लगी। अमित मेरी स्कर्ट उठा कर मेरी चूत में उंगलियाँ आगे पीछे करने लगा।
आह ! मुझे लोड़ा चूसने का गजब सुख मिल रहा था। बहुत देर से अमित का लौड़ा टनक रहा था, 2-3 मिनट के बाद लंड बाहर खींच कर अमित ने मेरे मुँह और स्तनों पर वीर्य की बारिश कर दी। इसके बाद हमने एक दूसरे को बाँहों में भरकर 10-12 प्यार भरी पप्पियाँ गालों पर लीं और मैं उससे बोली- अब तुम ऑफिस जाओ, शाम को अपने लंड को सही जगह घुसाना। मैं और मेरी रानी तुम्हारा इंतज़ार करेंगी।
अमित ऑफिस चला गया और मैं बाथरूम मैं घुस गई।
पूरे दिन मेरी चूत की आग भड़कती रही। शाम को सजधज कर लाल साड़ी ब्लाउज पहन कर मैं नीचे भाभी के पास आ गई, हम लोग बातें करने लगे। शाम को 7 बजे अमित आया। हमें 9 बजे मुझे मूवी देखने जाना था। मैंने भाभी को बताया तो भाभी हँसते हुए बोलीं- अमित तुम्हें चुदाई हाल में प्यासी दुल्हन दिखाने ले जाएगा।
मैं भी खुल गई थी, बोली- बड़ा मज़ा आएगा, आज प्यास भी बहुत लग रही है। पूरी प्यास बुझा कर आऊँगी।
हम सबने खाना खाया। मैं और अमित 8 बजे मूवी देखने निकल गए। हाल एक सुनसान इलाके में था। बालकनी में 8-10 जोड़े ही थे। हम जहाँ बैठे थे, वहाँ से सिर्फ एक जोड़ा ही दिख रहा था जो हमारे पास 4 सीट छोड़कर बैठा था।
अमित बोला- यहाँ बालकनी में सिर्फ जोड़े ही आते हैं, रात में मूवी कम और मस्ती ज्यादा करते हैं। 500 रुपए एक जोड़े का टिकट है।
अमित की बात सुनकर मूवी शुरू होने से पहले मैं बाथरूम गई और अपनी ब्रा और पेंटी उतार कर पर्स में रख ली। मूवी का नाम “प्यासी दुल्हन था” ही था। मूवी शुरू होने के 5 मिनट बाद ही एक नामर्द की बीबी की चुदाई पड़ोस के लड़के के साथ दिखाई जाने लगी, नंगे सीन देखते ही अमित और मैं शुरू हो गए।
पहले हमने एक दूसरे के होंठ चूमे, उसके बाद अमित ने मेरी चूचियाँ ब्लाउज खोलकर दबानी शुरू कर दीं। हमारे पास वाला जोड़ा भी आपस में गुथा हुआ था। हम दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कराए भी थे। इसके बाद मेरे पड़ोस वाली लड़की ने अपने यार का लंड निकाल कर चूसना शुरू कर दिया। मूवी में ब्लू फिल्म जोड़ दी गई थी एक लड़की पर तीन हब्शी चढ़े हुए थे। अमित ने अपना लौड़ा खोलकर मेरे हाथों में दे दिया, मैं उसे सहलाने लगी। पास वाला जोड़ा 5 मिनट बाद उठकर बाहर चला गया।खुला नंगा चुदाई का खेल परदे पर चल रहा था। अमित ने मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल रखा था और मेरी चूत सहला रहा था। चूत बुरी तरह पानी पानी हो रही थी, मुझसे रहा नहीं गया, मैंने अमित की सीट के नीचे बैठकर अमित का लोड़ा मुँह में डाल कर चूसना शुरू कर दिया।
तभी दूसरा जोड़ा अंदर आ गया तो मैं हट गई।
इंटरवल में पूरा हाल रोशनी से नहा गया। अमित और पास वाला आदमी बाहर चले गए, लड़की मेरे पास आई और बोली- हट क्यों गईं? चूसती रहतीं, यहाँ तो सब खुला होता है, लगता है पहली बार आई हो, शर्म आ रही है। महिला बाथरूम के पास जो आंटी बैठी है, उन्हें 200 रुपए कमरे के दे दो, ऊपर कमरे बने हैं आराम से चुदवा लेना। मैं भी ऊपर से लगवा कर आ रही हूँ। कितने रुपए लेती है तू एक रात के?
मैं बोली- मैं तो इनकी की पत्नी हूँ।
उस लड़की का नीलम था, नीलम हँसती हुई बोली- शर्माती क्यों है? यहाँ सभी रंडियाँ हैं, बीवियाँ तो घर में चुदती हैं, मैं तो 1000 रु हॉल में आने के लेती हूँ और रात को घर और होटल जाने के 2000 रुपए लेती हूँ।
मैंने उससे झूठ बोल दिया- 1500 रु एक रात के लिए हैं।
नीलम ने एक कार्ड दिया, उस पर उसका नंबर लिखा था, बोली- कभी ग्राहक न मिले तो मुझे फ़ोन कर देना 3000 रु दिलवा दूँगी पूरी रात के।
मैंने अमित को जब कमरे के बारे में बताया तो अमित बोला- मुझे बात पता है, रजनी भाभी के कहने पर ही तुम्हें इस हाल में एक नया मज़ा देने के लिए लाया हूँ।
मैं बोली- सच अमित, बड़ा मज़ा आ रहा है, चलो ऊपर चलते हैं, चुदने का बड़ा मन कर रहा है।
इंटरवेल के 5 मिनट बाद हमारे पास वाला जोड़ा बाहर चला गया। उसके 5 मिनट बाद मैं और अमित भी बाहर आ गए। हम लोग बाथरूम की तरफ गए तो आंटी मुस्करा रहीं थीं। आंटी मुस्कराते हुए अमित से बोलीं- आज बहुत सुंदर माल पकड़ कर लाया है।
अमित ने 200 रुपए आंटी को दे दिए वो हमें छत पर ले गईं। वहां तीन कमरे थे तीनों बाहर से बंद थे। अंदर से चुदने की आह ऊह ऊह की आवाजें आ रहीं थी, अंदर चुदाई चल रही थी।
तम्बाकू चबाते हुए आंटी बोली- तेरी सहेलियां बज़ रहीं हैं, थोड़ा रुकना पड़ेगा।
आंटी ने अंदर एक दरवाजे को खोला और बोली- कुत्ते, अब तू बाहर आ जा ! एक घंटे से लगा पड़ा है।
थोड़ी देर में एक लड़की अपने यार के साथ बाहर निकल कर आ गई। आंटी तम्बाकू चबाते हुए बोलीं- रंडी, अब तू जाकर चुदवा ले ! आधे घंटे बाद दरवाज़ा खोल दूंगी। मैं और अमित कमरे के अंदर आ गए, उसमें सिर्फ एक बल्ब था और एक तख्त पड़ी हुई थी। बगल वाले कमरे से चुदाई की आवाजें आ रही थीं। आंटी ने बाहर से सांकल लगा दी। मैं चुदने के लिए पागल हो रही थी, मैंने अपनी साड़ी उतार दी और ब्लाउज के बटन खोल दिए और पेटीकोट ऊपर चढ़ा कर तख्त पर लेट गई।
मैं बोली- अमित, जल्दी से चोद दो, सिर्फ आधा घंटा है।
अमित ने मेरा पेटीकोट ऊपर उठा दिया और मेरी चूत चूसने लगा।
मैं पूरी गर्म थी, बोली- अमित, चोद दो ! जल्दी चोद दो ! बहुत मन कर रहा है।
अमित के भी आग लगी हुई थी, उसने अपनी जींस और टीशर्ट उतार दी थी। आह ! उसका कितना सुंदर लोड़ा था जो मुझे पगलाए जा रहा था। मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मैं चिल्ला उठी- कुत्ते डाल दे न।
अमित भी अब पूरा कुत्ता बन गया था, वो भूल गया था कि मैं उसकी भाभी हूँ, अब मैं सिर्फ एक औरत थी उसने मेरी ब्लाउज उतारी और चूचियाँ निचोड़ते हुए बोला- कुतिया, तूने दो दिन से पागल कर रखा है, आज तेरी चूत की भोंसड़ी बना कर ही छोडूँगा। आज लाया ही तुझे चुदाई हाल मैं इसलिए था कि तेरी चूत बजा सकूँ। अमित से जो भी एक बार चुद ली है बार बार चुदने आती है।
अमित ने मेरा पेटीकोट ऊपर तक उठाकर दोनों टांगें फ़ैला दीं और लंड का अग्र-भाग मेरी चूत की फलकों पर रगड़ा तो मेरी ऊह आह आहा आहा आह। मज़ा आ गया, घुसा जल्दी घुसा की आवाजें छोटे से कमरे में गूंजने लगीं।
अब मैं अमित की कुतिया बनी हुई थी, मैं मस्ती में नहा रही थी, अगला पल जन्नत की सैर का था, लंड मेरी चूत में झटके से घुस चुका था, अमित को मैंने भींच कर अपने से चिपका लिया, अमित ने मेरे होंटों को चूसते हुए मेरी चूत में धीरे धीरे अपना लंड दौड़ाना शुरू कर दिया। आह, बड़ा मज़ा आ रहा था, आज बहुत दिनों बाद चुद रही थी, कुँवारी औरत तो जिन्दगी भर रह सकती है लेकिन लंड खाई बिना लंड के नहीं रह पाती है और मैं आज दुनिया का सबसे बड़ा सुख लंड सुख अमित से ले रही थी।
अमित ने अब खड़े होकर मेरी टांगें ऊपर उठा दीं थीं, अब वो मुझे टांगें पकड़कर जोरदार शोटों से चोद रहा था, उसका लंड मेरे पति से दुगना मोटा था, मज़ा और दर्द दोनों को मैं महसूस कर रही थी। अमित मेरी संतरियों को भी बीच बीच में कुचल देता था। मैं झड़ चुकी थी, मेरी चूत के पानी से उसका लंड नहा गया था लेकिन पूरा मोटा चूत में घुसा हुआ था। उसने लंड निकाल लिया और मुझे अपनी गोद में बैठा कर होटों से होंट मिला दिए और बोला- अभी तो इंटरवल है, एक राउंड और होगा।
मैं चुद चुकी थी, मेरी चूत शांत हो चुकी थी, मैंने अमित को मना किया लेकिन अमित अब एक मर्द था उसको मेरा और मर्दन करना था। उसने मेरा पेटीकोट खींच कर उतार दिया। अब मैं पूरी नंगी थी, आज मेरी चूत में दूसरा लंड घुस चुका था।
मेरी चूचियाँ मसलते हुए बोला- ज्यादा शरीफ बनने की कोशिश न करो, लंड अब पूरे हफ्ते तुम्हारी चूत में घुसेगा, हर रात नया मज़ा दूँगा। चलो उठो, घोड़ी बनो, पीछे से घुसाने का मज़ा लो। घर पर पता नहीं दुबारा भाभी के पास सो जाओ।
अमित ने मुझे अपना बल दिखाते हुए घोड़ी बना दिया। तख्त पर मेरे दोनों हाथ रखे थे, मैं घोड़ी बनी हुई थी। नीचे मेरी टांगें चौड़ी करके अमित लौड़ा लगाने की कोशिश करने लगा लौड़ा घुस नहीं पा रहा था। अमित बोला- भाभी जान, अपना एक पैर चौड़ा करके तख्त पर रख लो।
उसने मेरा एक पैर चौड़ा करवा के तख्त पर रखवा दिया और मेरा सर तख्त पर झुका दिया। मेरी चूत में उंगली करते हुए बोला- वाह भाभी, क्या मस्त चूत चमक रही है।
उसने मेरी चूत के दाने को मसलते हुए पूछा- भाभी यहाँ सब लोग रंडियां लेकर आते हैं, आप गुस्सा तो नहीं हो इस गंदे हाल में आकर?
मुझे इस समय बहुत आनन्द आ रहा था, बोली- गुस्सा क्यों होऊँगी? यहाँ मुझे कौन जानता है, सब लोग यही समझ रहे हैं कि मैं रंडी हूँ ! यह सोचकर गुदगुदी और हो रही है। अब तुम भी जल्दी से अपनी भाभी रांड को चोद दो और हाल में कोई पूछे तो रंडी ही बताना। अब चोदो, देर न करो !
अमित ने मेरी एक जांघ पर पीछे से हाथ रखकर टांग को फ़ैलाया और लोड़ा चूत में पेल दिया। एक चीख मेरी निकल गई, अगले ही पल मेरी चूत में लंड दनदनाते हुए घुस गया था। अमित ने मेरी कमर पर दोनों हाथ टिकाए और दनादन कुत्ते की तरह पेलना शुरू कर दिया था। शुरू के 1 मिनट मैं मैं जोर से चिल्ला रही थी, बड़ा जबरदस्त मज़ा था, थोड़ी देर बाद उसने झुककर मेरी चूचियाँ पकड़ ली और उन्हें दबाते हुए धीरे धीरे आहें भरने लगा।
मैं भी अब आनंदित हो रही थी, धीरे धक्कों के कारण मेरा दर्द कम हो गया था। कुछ देर बाद अमित ने फिर मुझे कमर से पकड़ कर जोर से ठोंकना शुरू कर दिया था। तभी दरवाज़ा खोल कर आंटी अंदर आ गईं थीं, अमित से बोलीं- जल्दी इस रंडी को बजा, पिक्चर 10 मिनट में ख़त्म हो जाएगी।
अमित का चोदना जारी था, मैं चिल्ला रही थी- अमित छोड़ो न !
लेकिन अमित मुझे चोदे जा रहा था, गली की कुतिया की तरह मैं चुद रही थी, आंटी बीड़ी पीते हुए मेरी चुदाई का आनन्द ले रहीं थीं, उनके साथ एक बुड्ढा आदमी भी मेरी चुदाई देख रहा था। अब मैं एक सड़क पर चुद रही कुतिया बनी हुई थी। अमित ने मुझे 5 मिनट तक चोदा इसके बाद अमित ने अपना लोड़ा बाहर निकल के सारा वीर्य मेरी गांड के मुँह पर छोड़ दिया। इसके बाद हम दोनों अलग हो गए।
आंटी मेरी और देखकर बोलीं- कुतिया, जल्दी से कपड़े पहन और निकल ले ! इधर शो ख़त्म हो चुका है।
मैं और अमित अपने कपडे पहनने लगे।
कपड़े पहन कर हम लोग बाहर आ गए। अमित की बाइक पर मैं अमित से चिपक कर बैठ गई। अमित मुझसे बोला- भाभी, मैं जब चोदता हूँ तो मुझे सिर्फ चूत और गांड दिखती है। आज चुदाई की मेरी गोल्डन जुबली है, आप 50वीं औरत हो जिसकी मैंने चूत चोदी है।
अमित बोले जा रहा था, अमित बोला- अब तक मैं 10 लोंडियों की गांड मार चुका हूँ और 4 की सील तोड़ चुका हूँ। मैंने नीचे वाली भाभी और उनकी बहन की चूत भी मार रखी है। थोड़ी देर बाद हम घर पर अमित के कमरे में थे। आज मुझे अमित के साथ सोना था।मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और पलंग पर लेट गई, अमित भी नंगा होकर मेरे पास सो गया। हम दोनों ने एक दूसरे को बाहों में भर लिया, अमित मुझे चूमते हुए बोला- भाभी इन सात दिनों में आपको चूत को एसा मज़ा दूँगा कि आप कभी भूल नहीं पाएँगी। रोज़ नई तरह का मज़ा।
अमित बोला- सुबह आराम से उठना, भाभी को मैसेज कर दिया है कि सुबह 11 बजे से पहले न जगाए। अब सोते हैं, सुबह आपकी चूत में लंड भी तो डालना है।
अमित और मैं एक दूसरे की बाँहों में सो गए।
सुबह 5 बजे अमित ने मुझे अपनी बाँहों में खींच लिया, उसका लंड खड़ा हो रहा था, उसने लंड मेरी चूत में घुसा दिया, हम लोग चिपक कर एक दूसरे से लिपट कर अर्धनिंद्रा में पड़े हुए थे, मेरी चूत में अमित का लोड़ा घुस कर मोटा हो रहा था, बड़ा अच्छा लग रहा था। आधा घंटा इसी तरह निकल गया। इसके बाद अमित मेरे ऊपर चढ़ गया और अपने लोड़े के वारों से मुझे मस्त मस्त चोद दिया। हम लोग दुबारा सो गए। 9 बजे मैं उठ कर बाथरूम में चली गई और नहा धोकर बाहर आई। आज अंदर से बड़ा अच्छा लग रहा था।
समय 11 से ऊपर हो गया था, अमित अभी भी नंगा पड़ा हुआ था, उसका लोड़ा सुकड़ा सा ठंडा पड़ा था, मैंने उसका लोड़ा पकड़ कर हिलाया और बोली- लोड़े के खिलाडी साहब, अब उठ जाइए।अमित हँसते हुए उठा और मुझे बाँहों में भरकर मेरे होंठों पर एक गहरा चुम्बन लिया और बाथरूम चला गया। मेरी चूत इस समय पूरी शांत थी। मैं सजधज कर नीचे भाभी के पास आ गई।
“आ गई?” भाभी मुझे देखकर मुस्कराईं और बोली- कल, लग रहा है सुहागरात-2 मन गई?
मैं शरमाते हुए बोली- भाभी, अमित तो बहुत बड़ा चोदू है, पूरी फाड़कर रख दी।
भाभी हँसते हुए बोली- मज़ा तो फड़वाने में ही है। अब आराम से रोज़ रात मरवा। बच्चे 3-4 दिन के लिए मामा के यहाँ जा रहे हैं। मैं भी तेरे साथ कुत्ते का डलवाऊँगी। साले का लंड ऐसा है कि एक बार डलवा लो तो बार बार डलवाने का मन करता है।
मैंने चाय बना ली और अमित को चाय पीने के लिए आवाज़ दी। अमित तैयार होकर नीचे आ गया। भाभी हँसते हुए बोलीं- अमित, कंचन बता रही है कि कल रात दर्द और मज़ा दोनों का इसने आनंद उठाया।
अमित ने भाभी के चूतड़ों को दबाते हुए कहा- जलन हो रही है?
भाभी बोलीं- आज रात कंचन से पहले मैं मज़ा लूँगी, बच्चों को लेने उनके मामा आ रहे हैं, अब मैं अकेली हूँ।
अमित ने कहा- सच?
और भाभी को अपनी बाँहों में भरकर मेरे सामने उनके होटों पर चूम लिया।
उसके बाद अमित, भाभी और मैंने प्रोग्राम बनाया कि हम आज रात 9 बजे भाभी की कार से लखनऊ जायेंगे और रात को भाभी के खाली पड़े फ्लैट में रुकेंगे।
भाभी बोलीं- रास्ते में कार में चुदना बड़ा मज़ा आएगा। दिन में तू पेपर देना, शाम को हम दोनों मज़े करेंगे।
अमित नाश्ता करके दफ़्तर चला गया, जाते समय मुझे 2-3 नग्न फ़िल्मों की सीडी दे गया और बोला- बोर हो तो देख लेना।
दो लंड खाने के बाद औरत की शर्म चली जाती है और उसके लंड खाने की भूख बढ़ जाती है, मेरे साथ भी कुछ ऐसा हो रहा था। मेरी चूत की आग तो शांत हो गई थी लेकिन लंड से खेलने की इच्छा बढ़ गई थी।
मैं ऊपर कमरे में आ गई और वीडियो लगा दी। अच्छी चुदाई वाली भारतीय फ़िल्म थी, 20-22 साल की 4-5 लड़कियों की चुदाई 50-55 साल के 4-5 अंकलों के साथ दिखाई जा रही थी।
मेरा मन भी अब लंडों से खेलने का कर रहा था, 5 बजे भाभी ने नीचे बुला लिया बच्चे मामा के साथ जा चुके थे। भाभी को जब मैंने बताया कि फ़िल्म देखकर तो मेरा मन और लंडों से खेलने को कर रहा है तो भाभी बोलीं- चिंता न कर ! हम दोनों की यह यात्रा चुदाई यात्रा होगी। दोनों मस्त होकर चुदवाएंगी, तू जितने लंडों से खेलना चाहेगी उतने से खिलवाऊँगी तुझे।
अमित 8 बजे रात को आया। 9 बजे हम लोग भाभी की कार से लखनऊ के लिए चल दिए। मेरी चुदाई यात्रा शुरू हो गई थी।
पिछला भाग - प्यासी दुल्हनहम लोग कार से लखनऊ के लिए रात में चल दिए। अगले दिन मेरी परीक्षा थी। मैंने सलवार कुरता और भाभी ने साड़ी ब्लाउज पहना था।
अमित बोला- तुम दोनों मुझे गाड़ी नहीं चलाने दोगी इसलिए चुपचाप पीछे बैठो।
अमित नेकर और टी शर्ट में था। हम दोनों मुँह बनाते हुए पीछे बैठ गए। भाभी ने बताया कि उन्होंने अपना फ्लैट सेट करवा दिया है और हम लोग रात को बारह बजे लखनऊ पहुँच जाएँगे।
भाभी रास्ते में अमित से बोली- अमित, तुम एक बार बता रहे थे कि तुम्हारे एक दोस्त का लंड 10 इंच लम्बा और ४ इंच मोटा है?
अमित बोला- सच बोल रहा था। उसका घर रास्ते में पड़ता है, अगर विश्वास नहीं होता तो दर्शन करा देता हूँ।
भाभी बोलीं- अगर छोटा निकला तो?
अमित बोला- पाँच हज़ार की शर्त रख लो।
दोनों मैं शर्त लग गई मेरी चूत उनकी बातें सुनकर मचलने लगी थी, मैंने भी आज तक 10 इंच लम्बा लंड नहीं देखा था। अमित ने अपने दोस्त को फ़ोन कर दिया। थोड़ी देर बाद रास्ते में वो मिल गया। गाडी मैं बैठकर हम उसके इंटों के भट्टे पर पहुँच गए।
भट्टे में एक कमरा बड़ी अच्छी तरह सजा हुआ था। अमित के दोस्त का नाम बबलू था। हम लोग अंदर बैठ गए।
थोड़ी देर बाद अमित बोला- बबलू, रजनी भाभी को अपना लंड दिखा दे। मेरी शर्त लगी है कि अगर 10 इंच से कम निकला तो 5000 रुपए भाभी को दूँगा।
बबलू बोला- मैंने आज तक कभी मुठ नहीं मारी ! जब से मेरा खड़ा होना शुरू हुआ है तब से सिर्फ चूत में ही डाला है। पहले दो साल तक तो अपनी चाची की चोदता था, उसके बाद तो गाँव की लड़कियों, रंडियों, भाभियों और भट्टे पर काम करने वाली औरतों की चोदता आ रहा हूँ। एक बार खड़ा हो जाता है तो फिर बिना चूत में डाले लंड को नहीं बैठाता। अब यह बता दो कि तुम दोनों डलवाओगी या किसी एक को चोदूँगा। गांड मैं मारता नहीं, और आधे घंटे से कम चोदता नहीं हूँ।
अमित बोला- भाभी डलवा लो, मज़ा आएगा।
रजनी बोली- मैं तो डलवा लूँगी लेकिन कंचन को भी घुसवाना पड़ेगा। कुतुबमीनार देखने का मन तो इसका भी कर रहा है।
मैं झेंप गई, मैं बोल गई- नहीं नहीं मुझे तो बस देखना है मैं नहीं घुसवाऊँगी।
बबलू इतना सुनकर मेरे पीछे आ गया और मेरी कुरती में हाथ डालकर मेरे दोनों संतरे मसलते हुए बोला- दिखा देंगे, तुझे भी दिखा देंगे, तेरा माल तो देख लें पहले !
और उसने कुरता ऊपर उठा कर मेरे संतरे मसलने शुरू कर दिए। सामने भाभी मुस्कराते हुए मेरी चूचियों की मसलाई देख रही थीं।
बबलू ने हाथ हटा कर मेरी पजामी का नाड़ा खोला और पीछे से कुरते की चैन खोल दी। पज़ामी नीचे सरक गई, बबलू बहुत ताकतवर था, मेरी कुरती भी उसने उतार दी और मुझे गोद में उठाकर अमित की गोदी में बैठा दिया। मेरे बदन पर अब सिर्फ पेंटी थी। मेरे नंगे संतरे कमरे की शोभा बढ़ा रहे थे।
अमित मेरी पेंटी में हाथ डालते हुए बोला- मज़े कर लो भाभी ! ऐसा मज़ा दुबारा नहीं मिलेगा।
बबलू भाभी की तरफ बढ़ा और बोला- अब तेरी चूचियों को देखता हूँ ! बहुत बड़ी बड़ी लग रही हैं।
ब्लाउज उसने आगे से खींच कर फाड़ दिया, भाभी के मोटे मोटे गोल गोल स्तन आजाद हो गए।
बबलू चिहुंका- वाह, क्या सुंदर पहाड़ हैं रानी !
बबलू ने उन्हें मुँह में ले लिया और चूसने लगा और बाद में पीछे जाकर बबलू भाभी के स्तनों को भोपूं की तरह बजाने लगा।अब मुस्कराने की बारी मेरी थी। उसने इस बीच भाभी का पेटीकोट और साड़ी भी उतार दी। भाभी पूरी नंगी हो चुकी थीं, उनकी चूत के दाने को बबलू रगड़ रहा था। भाभी को नंगी देखकर मेरी शर्म कम हो गई थी।
भाभी अमित से बोलीं- कंचन की पेंटी उतार दो न ! मुझे नंगी देखकर यह रंडी खुश हो रही है।
अमित ने मेरी पेंटी उतार दी। उसके बाद बबलू ने गोदी में उठाकर भाभी को मेरी बगल में बैठा दिया और बारी बारी से मेरी और भाभी की पप्पी लेता हुआ बोला- बदतमीज़ी के लिए माफ़ करना ! नंगी बहुत सुंदर लग रही हो।
इसके बाद अमित और बबलू ने अपने कपड़े उतार दिए। मेरी और भाभी की नज़र बबलू की चड्डी पर थी, उसका लंड चड्डी में से मोटा और बड़ा होने का अहसास करा रहा था।
अमित और बबलू ने अपनी अपनी चड्डियाँ उतार दी। दोनों के तने लंड बाहर निकल आए।
बाप रे बाप ! बबलू का क्या मोटा और लम्बा लंड था बबलू के सामने अमित का 8 इंची लंड छोटा और पतला लग रहा था।
बबलू ने भाभी को उठाकर अपनी जांघों पर बैठा लिया और लंड हाथ में देता हुआ बोला- रानी देख लो ! थोड़ी देर में यह तुम्हारी सुरंग में दौड़ेगा।
भाभी बोली- कंचन, वाह ! क्या लम्बा है ! बाप रे बाप ! यह तो आज चूत फाड़ कर चूत की भोंसड़ी बना देगा ! जरा स्केल तो निकाल अपने बैग से, आज तो लग रहा है कि शर्त हार गई।
मैंने अपने बैग से 12 इंची स्केल निकाल लिया। भाभी ने लंड नापा तो १० से थोड़ा कम था।
भाभी बोलीं- यह तो दस से कम है।
बबलू बोला- कुतिया, अभी तो यह खड़ा हो रहा है, मुँह में डालूँगा तब और लम्बा होगा लेकिन सोच लेना जो पहले मुँह में लेगी उसकी चूत में बाद में घुसेगा।
भाभी बोलीं- कंचन, तुम चूस लो, इसका अगर तुम्हारी चूत में इसने पहले डाल दिया तो कल पेपर नहीं दे पाओगी, मैं तो पुरानी रांड हूँ, चुदवा कर कल आराम से सोऊँगी।
बबलू खाट पर बैठ गया, उसने मुझे खींच कर जमीन पर अपनी टांगों के बीच बैठा लिया और अपना लौड़ा मेरे हाथों में पकड़ा दिया। मैंने उसका लंड हाथ में पकड़ा तो ऐसा लगा जैसे कोई लोहे की बड़ी रॉड पकड़ ली हो।
बबलू ने बाल सहलाते हुए मेरे मुँह पर लंड रख दिया और बोला- अब जल्दी से चूस ले। तू मुझे बहुत प्यारी लग रही है, तेरी चूत में भी घुसेगा और प्यार से तेरी चोदूँगा। प्यार से पूरा अंदर तक डाल कर चूसियो ! अच्छी तरह नहीं चूसा तो तेरी भाभी से ज्यादा फाड़ दूँगा।
मैंने बबलू का लंड चूसना शुरू कर दिया पूरा मुँह फाड़ के चूसना पड़ रहा था बबलू भी पूरी हलक तक घुसा देता था । दस-बारह बार चूसने के बाद उसने लंड बाहर निकाल लिया और भाभी से बोला- ले रांड, अब नाप ! फिर तुझे बताता हूँ चुदाई क्या होती है।
भाभी भी आश्चर्य से बबलू का लंड देख रहीं थी, अबकी उन्होंने नापा तो लंड दस इंच से थोडा बड़ा ही था।
भाभी हार गईं थी, अमित उन्हें देखकर मुस्करा रहा था।
बबलू ने भाभी के गले में हाथ डाल कर उनकी गेंदें हिलाईं और बोला- रजनी डार्लिंग ! आराम से खोलकर मरवाओगी या मैं अपने अंदर के राक्षस को जगाकर तुम्हारी मारूँ?
भाभी लौड़ा सहलाते हुए बोलीं- प्यार से मरवाने में ही भलाई है कुत्ते ! लेकिन थोड़ा प्यार से मारना, इस जैसा लम्बा-मोटा लंड तो देखने को भी नहीं मिलता है।
“हैं? ऐसी बात है? तो चुपचाप नीचे गद्दे पर लेट जा !”
भाभी बबलू के इशारे पर उठकर नीचे पड़े गद्दे पर लेट गईं। बबलू ने मेरी तरफ देखा और बोला- तू अमित से अपनी फुद्दी थोड़ी चौड़ी करवा ले ! जब तेरी फुद्दी में घुसेगा तो दर्द कम होगा। नई नवेली दुल्हन का माल तो बड़ा नमकीन होता है। तेरी चूत चोदने मैं तो मज़ा आ जाएगा।
मुझे उठाकर उसने अमित की जाँघों पर बैठा दिया और मेरी दोनों चूचियाँ कस कर दबा दीं। इसके बाद उसने नीचे झुककर भाभी की टांगें उठाईं और उनकी चूत में अपना दस इंची लंड घुसा दिया।
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